पाषाणाचे काळीज ज्याचे
माणुसकीची हत्या करी
या नराधमासाठी तर
फाशीची शिक्षाही अपुरी
माणुसकीची हत्या करी
या नराधमासाठी तर
फाशीची शिक्षाही अपुरी
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
सिगारेटच्या धुराने झाली
कित्येक आयुष्ये बेचिराख
या धुरामध्ये काय मानवा ?
तू जीवनाची गोडी चाख
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
ऋतू असो कोणताही
आम्ही सदा केली सेवा
हीच का चूक आमची
सांग तू आम्हास देवा
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
जगाच्या कोलाहलापासून दूर
आपलेही एखादे घर असावे
सागराच्या नीरव शांततेत
सुखांना बिलगून घ्यावे
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
कृष्ण-सुदाम्यासारखी
मैत्री असावी निखळ
स्वार्थाला नसावा थारा
प्रेमाने गाठावा तळ
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
अरे निर्दयी पावसा, तुझ्या आगमनाची
केव्हापासून लावून होतो मी आस
लेकराबाळांचे दुःख पाहवत नाही आता
म्हणून घेतो मी आज गळफास
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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"सुन" या उच्चाराची मराठी-हिंदी-इंग्रजी गंमत असणारी चारोळी :
मराठीत श्वानास म्हणे "सुण"
सासू जिच्याशी भांडते ती "सून"
आजारपणात गेट वेल "soon"
हिंदीत ऐकण्याला म्हणे "सुन"
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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रंगीबेरंगी दुनियेत या
आज रंगच गुलाम झाला
भगवा, हिरवा, निळा असा
रंग साऱ्यांनी वाटून घेतला
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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भारत देश हा माझा
एकेकाळी सोन्याची खाण
आता मात्र जिकडेतिकडे
दिसे फक्त घाण
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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ऑनलाईन गेमिंगच्या जमान्यात
हरविले माझ्या मातीचे खेळ
क्लासेसला जुंपले उन्हाळ्यात
आताही नसे खेळांशी ताळमेळ
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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क्रिकेटच्या वेडाने
बाप्पांनाही नाही सोडले
मूषकराजांना संगे घेऊन
बाप्पाही मैदानात उतरले
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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नदीला न्याहाळण्यात
मी इतका गुंग झालो
नदीच्या प्रवाहात
माझे मन हरवून बसलो
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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चांगला व्यक्ती आज-काल
निवडणूक लढवत नाही
कारण पैसा वाटल्याशिवाय
निवडणूक लढवत नाही
कारण पैसा वाटल्याशिवाय
नेता निवडून येत नाही
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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अंतरंगातून माझ्या
आज मी बाहेर डोकावलो
बाहेरची दुनिया फार फसवी
हे कळून चुकलो
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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यंत्रयुगात या
आम्ही संवेदना हरवलोय
भावना नसणारे
आम्ही रोबोट झालोय
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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भ्रष्टाचाराच्या चिखलात
फसला माझा देश निर्मळ
डबक्यास या साफ करुनी
मी यास बनवू पाहतो कमळ
• विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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इतके सौभाग्य
मजला प्राप्त व्हावे
जन्मलो ज्या भूमीत
त्यातच मरण यावे
:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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