सुधाकरी




 धुंद विहरोनी
बहुरंगी पक्षी
काढतात नक्षी
आकाशात 


• विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.
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बहुरंगी पक्षी

नभी विहरती
आनंदीत होती
उडोनिया


:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती. 
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स्व. बाबा आमटे यांना अर्पण  
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कार्य तुझे असे 
डोळां अश्रू दाटे 
स्वर्गालाही वाटे 
गर्व तुझा 

:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.

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कडक उन्हाने 

जीव हा तापतो

कराया लागतो

पाणीपाणी 

:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.

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आम्ही शेतकरी 
उन्हात राबतो 
तरीही मरतो 
उपाशीच.... 

:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.

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आदर्शची 'माळ'
पडलीय गळा 
राज्यावर इळा

अशोकच्या


:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.



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पूर्ण झाले आज 
स्वप्न ते सुंदर
शतकी डोंगर 
उभारून

:- विश्वजीत दीपक गुडधे,
अमरावती.


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या पापी पोटाची

भराया खळगी

घालवी जिंदगी

पाईपात 

:- विश्वजीत दीपक गुडधे, 

अमरावती.












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चिमणी - कावळा 
झाले आता लुप्त 
दिसतात फक्त 
चित्रांतच 















:- विश्वजीत दीपक गुडधे, 

अमरावती.


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